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सिर्फ चेहरा झुलसा है तेरा, शरीर में जान अब भी बाकी

 




ये दाग तेरी पहचान नहीं

तुझे नाम कमाना अब भी बाकी

सिर्फ चेहरा झुलसा है तेरा

शरीर में जान अब भी बाकी

जलाया है तुम्हारा चेहरा उन्होनें

ऐ नाकाम बंदे! अब देख!

की होसलो के चिराग से रोशन

करेंगे सारा जहान वो कैसे

कसूर इतना कि

मोहब्बत के इज़हार से बस

इंकार किया

कमबख़्त उन लोगो ने तेज़ाब से भरी

बोतल को लड़की के चेहरे पर डाल  दिया

प्यार से प्यार न मिला, तो यूं जला दिया तुमने

अभी तो महकी ही थी जिंदगी

तो यूं जला दिया तुमने

हे मतवालों अपने आप को समझाना   

याद करो अपनी बेटी, बहना,

ना करें किसी की जननी की कोख खराब

तुमने क्यों फेंका तेज़ाब

तुमने क्यों फेंका तेज़ाब

काश नियम ये आ जाए

तेज़ाब फेंकने पर तुमको

जलती लकड़ी से दागा जाए

झुलसी हुई आत्माओं को शायद

थोड़ा सा न्याय मिल जाए

थोड़ा सा न्याय मिल जाए



अब महिलाएं चुप नहीं रहेंगी। वे आवाज बुलंद करेंगी।

कोई द्वार नहीं है, कोई ताला नहीं है और कोई बोल्ट नहीं है जिसे आप उनके मन की स्वतंत्रता पर लगा सकते हैं।


स्नेह लता

चंडीगढ़, भारती एन आइडियल ह्यूमैनिटी एंड कैम्पेशन द्वारा आयोजित मिस एंड मिसेज भारत 2021 -प्रतियोगी संख्या 4  इस कविता को जूम मीट में खूब प्रशंशा की गई