
सत्यबन्धु भारत। सी वी आजाद।
मृतका के पति ने लगाया हॉस्पिटल पर 30 हजार रुपये लेने व गर्भवती की मौत के बाद भी गुमराह करने का आरोप
हरदोई। हरदोई जनपद में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से फर्जी हॉस्पिटल बेधड़क चल रहे है। ये हॉस्पिटल आये दिन लोगो की जिंदगी से खेल रहे है। हरदोई शहर में संचालित फर्जी हॉस्पिटल ने जच्चा बच्चा की जान ले ली। मृतका के पति से इलाज की एवज में 30 हजार रुपये ले लिए।
कोतवाली शहर थाना क्षेत्र के मंगलीपुरवा फाटक के पास एक तथाकथित समाजसेवी राजवर्धन सिंह (राजू) की पूर्व में विवादों के लिए चर्चित बिल्डिंग में शहर हॉस्पिटल संचालित है सूत्रों की माने तो इस अस्पताल का रजिस्ट्रेशन भी नही है। बुधवार की शाम गांव पिढ़वा निवासी योगेन्द्र मिश्रा की पत्नी जो कि गर्भवती थी जिसको प्रसव पीड़ा के चलते हरदोई के रानी साहिबा अस्पताल में लेकर गए जहां गेट पर मिले एक सौरभ दीक्षित नाम के व्यक्ति ने अच्छे इलाज के नाम पर गर्भवती के परिजनों को गुमराह किया व डिलीवरी के लिये दूसरे अस्पताल शहर हॉस्पिटल में शोभा मिश्रा को भर्ती करवा दिया। जहाँ मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने अच्छे इलाज का वायदा कर 30 हज़ार रुपये नगद जमा करा लिए और इलाज शुरु कर दिया इलाज से शोभा की हालत बिगड़ गयी। परिजनों के अनुसार गर्भवती शोभा की हालत बिगड़ती देख उसे लखनऊ के किसी अस्पताल में ले जाना चाहते थे लेकिन अस्पताल का स्टाफ परिजनों को लगातार गुमराह करता रहा और जच्चा-बच्चा को पूर्ण स्वस्थ होने की बात करता रहा और इलाज के नाम मर रुपये ऐंठता रहा लेकिन कुछ ही घण्टे बाद शोभा की मृत्यु हो गयी। आरोप है कि गर्भवती व उसके गर्भ में बच्चे की मौत के बाद भी हॉस्पिटल के स्टाफ ने परिजनों को गुमराह किया और कुछ घण्टे शव को अस्पताल में बीतने के पश्चात बताया कि शोभा की मौत हो चुकी है। मृतका के पति ने बताया कि अस्पताल में दो बार मे 30 हजार रुपये उससे ले लिए गए, और मृतका की डेडबॉडी भी देने से मना किया गया।
परिजनों ने बताया कि शोभा की मौत के बाद हॉस्पिटल का अधिकांश नर्सिंग स्टाफ गायब हो गया, लापरवाही से गर्भवती की मौत पर गुस्साए परिजनों ने शहर हॉस्पिटल पर हंगामा करना शुरू कर दिया, सूचना से पुलिस मौके पर पहुँची शव को हॉस्पिटल से निकलवाया और पोस्ट मॉर्टम को भेजा।
जनपद में हो रही इस तरह की मौते कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर जनपद में सैंकड़ो की संख्या में संचालित इस तरह के अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही क्यों नही करता है?
