
सत्यबन्धु भारत
न्यूज डेस्क। अब तक 200 से अधिक शहरों में पदयात्रा कर चुके मेरठ के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश तलवार व दिशा तलवार पिछले 28 सालों से जनसंख्या नियंत्रण की मुहिम चलाने मे लगे हुए हैं, मेरठ के तलवार दंपत्ति अब तक देश के प्रधानमंत्री को करीब 80,000 पोस्टकार्ड , और करीब 6000 ज्ञापन पिछले 28 सालों से प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखते आ रहे हैं और इस अभियान को लेकर वह दोनों देश भ्रमण पर अक्सर निकलते हैं, दिनेश तलवार व दिशा तलवार 1992 से इस अभियान को चला रहे हैं वह जिस शहर में भी जाते हैं वहां उल्टी पदयात्रा के माध्यम से लोगों को जागरुक करते हैं और खाली पोस्टकार्डस जनता को देते हैं और उनसे पत्र में बढ़ती जनसंख्या से होने वाली हानियां लिखवाकर देश के प्रधानमंत्री पहुंचाते हैं , सड़क पर चलते हुए या बस मे चढ़ कर लोगो को अपनी आवाज़ से यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि बढ़ती जनसंख्या देश की बर्बादी की सूचक है इसके अतिरिक्त विभिन्न शहरों में पदयात्रा के बाद वहाँ के जिलाधिकारी के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री को पत्र भेजते हैं ।
परंतु दुर्भाग्य से हजारों की संख्या में पत्र भेजने के बाद भी आज तक किसी भी राजनीतिक दल और नेता ने उनके किसी भी पत्र पर गंभीरता नहीं दिखाई है ।
1994 से इस अभियान को उनके परिवार का पूरा समर्थन है उनकी बिटिया सिमरन तलवार और बेटा यश तलवार इस मुहिम में हमेशा उनके साथ होते है।
दिशा तलवार का कहना है कि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से हमको आशा है कि वह हमारी बात गंभीरता से लेंगे । 1994 से लेकर अब तक हमने देश के हर प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा परंतु आज तक किसी भी प्रधानमंत्री ने मिलने का समय नहीं दिया ।
तलवार दंपति का कहना है कि जिस देश में 1 मिनट में 42 बच्चे पैदा होते हो और रोजाना 61000 बच्चों का जन्म होता है उस देश का भविष्य कैसा होगा, यह चिंता का विषय है जिस पर चिंता और चिंतन सरकार कभी नहीं करती ।
आजादी के वक्त आबादी 33 करोड़ थी और आज 136 करोड़ को पार कर गई है जिस दिन से मोदी जी देश के प्रधानमंत्री ने शपथ ली है उस दिन से दिशा तलवार व दिनेश तलवार रोजाना देश के प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड लिखते हैं यह अभियान 365 दिन तक चलेगा इसके अतिरिक्त 150 शहरों में पदयात्रा कर चुके तलवार दंपत्ति देश के 365 शहरों की की पदयात्रा करेंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वह देश के प्रधानमंत्री को जनसंख्या वृद्धि पर पत्र लिखें उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर सरकार जनसंख्या दिवस क्यों नहीं बनाती जनसंख्या वृद्धि पर कार्य करने वालों को कोई पुरस्कार नहीं देती आरटीआई के माध्यम से दिनेश तलवार ने जाना कि 1992 में 97 संशोधन बिल नरसिम्हा राव की सरकार में बना था चुनाव वही लड़ेगां इसके 2 बच्चे होंगे परंतु आज तक वह बिल पेश नहीं किया गया ।
आजादी के बाद किसी भी प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर जनसंख्या नियंत्रण की बात कभी नहीं कहीं कविता चलकर कभी बसों में चढ़कर या किसी भी चौराहे पर जागरूकता करते करते अब उनको यह लगता है कि इस मिशन पर सरकार कतई गंभीर नहीं है कभी कभी वह हार भी मान जाते है यह दंपत्ति परंतु इस उम्मीद के साथ की वर्तमान प्रधानमंत्री शायद कुछ उनकी बातों को गंभीरता से लेंगे
यह कहते हैं चीन की नीति पर भी विचार हो चुनाव हो , जिसके 2 बच्चे हो साथ ही जनसंख्या अधिकारी की नियुक्ति हो ।
पाठ्यक्रम में बढ़ती जनसंख्या से होने वाली हानियां बताई जाए और ना जाने कितने ही सुझाव इस देश के महान नेताओं को भेजे जा चुके हैं परंतु आज तक सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी आंखें बंद कर रखी है एक बार उन्होंने यह मिशन चलाया था कि नेता कैसा हो जिसके बच्चे दो हो वोट उसी को दें जिसके बच्चे दो हो तो इस बात को लेकर एक प्रत्याशी के कार्यालय के बाहर जनसंख्या के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई तो उस प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने उनकी पिटाई कर दी लेकिन फिर भी तलवार दंपत्ति ने हिम्मत नहीं हारी और वह इस संघर्ष को बराबर जारी रखें हुए हैं ।।
मेरठ निवासी दिनेश दिशा तलवार पेशे से इंश्योरेंस का काम करते हैं और रोजाना एक पत्र देश के प्रधानमंत्री को लिखना उनकी आदत हो गई है कई बार सत्याग्रह कर चुके मानव श्रखंला और उपवास, नुक्कड़ नाटक प्रदर्शन अनेकों माध्यम से जनता को जागरुक कर चुके हैं परंतु उनका कहना है कि जागरूकता करते करते भी 33 करोड़ से 136 करोड़ हो गए आखिर सरकार कब इस मुद्दे पर गंभीर होगी और कोई नियम बनाएगी उनका यह कहना है कि हमने अब तक करीब 4 करोड़ों लोगों को जागरूक किया परंतु आबादी की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है साथ ही चिंता व्यक्त की खो गए हैं वह नारे हम दो हमारे दो , छोटा परिवार सुखी परिवार ।
अब दीवारों पर , बसों पर लिखा हुआ नजर नहीं आता ।
देश के अधिकांश नेताओं को इस मुद्दे पर पत्र लिख चुके हैं
आप इतने वर्ष हो चुके हैं कि आप तो उनकी आदत सी बन गई है पत्र लिखने की प्रत्येक दिन सुबह उठकर पत्र लिखना प्रधानमंत्री के नाम फिर उसको हटा करके पोस्ट करना और कई जगह नुक्कड़ सभाएं करके वहां भी लोगों से पर्स लेकर आना और माननीय प्रधानमंत्री के कार्यालय में कुछ ना बस इसी उम्मीद से 1 दिन सरकार उनकी यह मांग जरूर सुने की जनसंख्या पर कोई कानून जरूर बनाएगी
