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भारतीय परिप्रेक्ष्य बदली दुनिया बदले लोग विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार




बोधगया। मगध विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग एवं जनसंचार समूह क़े तत्ववाधान में भारतीय परिप्रेक्ष्य बद्ली दुनिया बदले लोग विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेव गोष्ठी के अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि बहुत सारे ऐसे परिवर्तन हुए हैं जो युगांतकारी  सिद्ध हुए हैं और जीवन के गहनतम परिवर्तन डालते हैं। उसे क्रांतिकारी परिवर्तन कहते हैं। सभ्यता के विभिन्न चरणों में मानव ने जो कुछ किया उन प्रणालियों का सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं सांसारिक हित भी प्रभावित पड़ा। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के कारण युद्ध कला भी बदल गया। रोबोटिक मानव भी इसका हिस्सा बन रहा है। यह भी एक बड़ा परिवर्तन है। इसलिए स्पष्ट रूप से यह कहा जा सकता है की दुनिया तेजी से बदल रही है। एक कोरोना वायरस ने मानव का सोच बदल दिया। मैन मेड वायरस ने संपूर्ण विश्व को भयाक्रांत किया। उन्होंने कहा कि बहुत सारे देशों में संसाधनों के लिए हिंसात्मक संघर्ष हुए। राष्ट्रों के आंतरिक एवं वाह्य क्रियाकलापों में भी परिवर्तन हुआ है। जनता की सरकार से अपेक्षाएं बढ़ी है। कोरोना महामारी ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राष्ट्र में असीमित संसाधन नहीं हो सकते। अमेरिका जैसे देश ने भी सभी को वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं करा पाया।


मुख्य अतिथि नव नालंदा महा बिहार के कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य की बड़ी विडंबना रही है कि हमने पूरी दुनिया को परिवार माना और बदले स्वरुप में देख रहा है। उन्होंने कि कहा कि रक्तबीज का आधुनिक रूप है कोरोना। कहा कि पश्चिमी दृष्टिकोण ने हमें मानसिक रुप से गुलाम बना दिया है।


मुख्यवक्ता वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भारतीय रेलवे सुरक्षा बल रेल भवन नई दिल्ली के महानिदेशक अरुण कुमार ने कहा कि पूरी दुनिया में यदि कुछ शास्वत है तो वह परिवर्तन है। पृथ्वी भी परिवर्तनशील है। हर समय हमारा मन भी बदलता रहता है यद्यपि हम अनुभव नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि इस महामारी का रूप कहां तक जाएगा, इसके बाद वास्तविक बदलाव परिलक्षित होगा। उन्होंने कहा कि एक ही चीज दो ढंग से प्रभावित करता है उन्होंने कोरोना काल में जब सारी व्यवस्थाएं ठप थी वैसे समय में रेलवे सहित अन्य विभागों में ऐसे कार्य किए गए, जो सामान्य अवस्था में संभव नहीं हो रहा था। इसलिए हमें मान कर चलना चाहिए कि जो होता है, वह अच्छा ही होता है। यह परिवर्तन विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है

विशिष्टअतिथि पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि सृष्टि पर जबरदस्त परिवर्तन हुआ है और इसका फैलाव भी बहुत तेजी से हुआ। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी ने भूमंडलीय चेंज किया। बदलती दुनिया ने हमें सभी संसाधन दिए हैं। इस बदलाव में भी हमें आशावादी होना चाहिए। इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ने ग्लोबल जॉब टेक्नोलॉजी खोल दिया है।


विशिष्ट वक्ता समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो दीपक कुमार ने कहा कि न्यू नॉर्मल सोसाइटी और चेंज सोसाइटी तक हमें अध्ययन जारी रखना होगा। जो चीजें बदल रही है या बदलने की संभावना है उसको जानना जरुरी है। उन्होंने सोशियोलॉजी ऑफ हैप्पीनेस पर कार्य करने की जरूरत बताई। कहा कोरोना के वजह से एक डिजिटल रिस्क सोसाइटी का निर्माण हो सकता है।


समन्वयक पत्रकारिता एवं जनसंचार समूह के समन्वयक डॉ शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने वेव गोष्ठी का संचालन करते हुए विश्व स्तर पर हो रहे सामाजिक, आर्थिक और परिवारिक परिवर्तनो को रेखांकित किया। वेबीनार में प्रो आरएस जमुआर, प्रो आरपीएस चौहान, प्रो सुधीर कुमार मिश्र, डॉ के के मिश्र, डॉ अंजनी घोष, डॉ मीनाक्षी, डॉ अतुल श्रीवास्तव, डॉ शूलपाणी सिंह, डॉ एकता वर्मा, डॉ अलका मिश्र, डॉ तेजी ईशा, डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, प्रीति प्रभा, विश्वजीत दास, रेणु कुमारी, प्रियंका, विभा कुमारी सहित देशभर के शिक्षक, शोधार्थी व सामाजिक सरोकारों के लोगो ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। सहायक अध्यापक डॉ रूनू रवि ने स्वागत, डॉ वंदना कुमारी ने अतिथियों तथा प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया और नोडल अधिकारी डॉ संजय कुमार ने तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराई।