सत्यबन्धु भारत
अंकित वर्मा
कछौना,हरदोई। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रत्येक ग्राम सभा को खुले में शौच मुक्त करने के लिए घर-घर शौचालय बनाए जाने का अभियान चलाया गया था। जिसमें काफी परिवार शौचालय से वंचित हो गए थे। पूरी ग्राम सभा को खुले में शौच मुक्त कराने के प्रत्येक ग्राम सभा में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य कराया गया था, परंतु विभागीय अधिकारियों की खाऊ कमाऊ नीति के चलते इन सामुदायिक शौचालयों का निर्माण ठेके पर मानकों को ताक पर रखकर कराया गया। पीला ईंटो का उपयोग, मसाला की गुणवत्ता मानक विहीन निर्माण कराकर खानापूर्ति कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। जिसके कारण यह कुछ ही दिनों में उपयोग में नहीं आएंगे। जिससे लोगों को योजना का सही लाभ नहीं मिल पाएगा। अधिकारियों को गलत रिपोर्टिंग दिखाकर फीलगुड करा दिया जाता है। जमीनी हकीकत में इन सामुदायिक शौचालय में विद्युत व्यवस्था की कमी, समरसेबल, हैंडपंप भी नहीं लगा है। दिव्यांग लोगों के लिए समुचित व्यवस्था का अभाव, स्नानगार , हैंड वाश, शौचालय, गड्डे, चेंबर अपूर्ण है।जल निकासी हेतु सोख्ता गड्ढा नहीं बने हैं। रखरखाव के लिए स्वयं सहायता समूह केयरटेकर का चयन प्रक्रिया अभी अधर में लटकी है। जिसके कारण लाखों रुपयों की कीमत से बने सामुदायिक शौचालय उद्देश्य विभिन्न है। कछौना की 41 ग्राम सभाओं में अभी तक तीन ग्राम सभा बरौली, सुन्नी, त्यौरी मतुआ में अपूर्ण पड़े हैं। इन सामुदायिक शौचालयों के निर्माण व उपयोग की जमीनी हकीकत के जानने के लिए भारत सरकार द्वारा नामित टीम द्वारा गांव-गांव जाकर निरीक्षण किया जा रहा है। पूरे मामले की रिपोर्ट टीम केन्द्र सरकार को भेजेंगी। योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन न होने के कारण लोगों के जीवन में बदलाव नहीं आता है।
