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कोरोना संक्रमित ससुर को पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाईं..उसके जज्बा देखकर लोग कह रहे हैं बहू हो तो निहारिका जैसी

असम के नगांव की रहने वाली निहारिका दास ने समाज के लिए एक अनोखी मिसाल पेश की है। निहारिका ने कोरोना पॉजिटिव ससुर को पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंची।


असम के नगांव की रहने वाली निहारिका दास ने समाज के लिए एक अनोखी मिसाल पेश की है। निहारिका ने कोरोना पॉजिटिव ससुर को पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंची।


नई दिल्ली। पूरी दुनिया में महामारी कोरोना वायरस का कहर जारी है। इस महामारी से हर कोई प्रभाति है। कई लोगों ने इस मुश्किल वक्त में अपना ही साथ छोड़ दिया है। वहीं कुछ ऐसे भी है जिन्होंने एक मिसाल पेश है जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। असम के नगांव की रहने वाली निहारिका दास ने समाज के लिए एक अनोखी मिसाल पेश की है। बेटे का फर्ज निभाकर वह आदर्श बहू बन गई हैं। निहारिका ने तब सबको हैरान कर दिया जब वह अपने कोरोना संक्रमित ससुर को पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचीं। जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। फोटो को देखकर लोग कह रहे है कि 'बहू हो तो निहारिका दास जैसी'।


अक्सर देखा जाता है जब परिवार की किसी बुजुर्ग कोरोना वायरस की चपेट में आ जाते है तो घरवाले उसे दूरी बना लेते है। उनके एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया जाता है ताकि बाकी घरवालें संक्रमित नहीं हो। लेकिन असम के नगांव की रहने वाली निहारिका दास ने ऐसा नहीं किया। निहारिका अपने कोरोना संक्रमित ससुर को पीठ पर लादकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं थीं। आपको यह जानकर हैरानी होग कि वह करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलीं, उसके बाद अस्पताल पहुंचीं।


निहारिका के ससुर थुलेश्वर दास राहा क्षेत्र के भाटिगांव में सुपारी विक्रेता थे। वहीं निहारिका के पति सिलीगुड़ी में काम करते हैं। 2 जून को थुलेश्वर दास की तबीयत बिगड़ी और उनमें कोरोना के लक्षण नजर आए। उन्हें 2 किमी दूर राहा के स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए बहू निहारिका ने रिक्शे का इंतजाम किया, लेकिन ऑटो रिक्शा घर तक नहीं आ सका। घर में कोई सदस्य मौजूद नहीं था जो उनके ससुर को अस्पताल तक पहुंचा सके। ऐसे में निहारिका ने ससुर को पीठ पर लादकर वह ऑटो स्टैंड तक ले गईं और फिर स्वास्थ्य केंद्र पर ऑटो से निकालकर अस्पताल के अंदर ले गईं। इस दौरान किसी ने 6 साल के बेटे की मां निहारिका की मदद नहीं की।