धर्मांतरण के मामले में पकड़े गए जिले के रहने वाले मौलाना उमर गौतम की कई जगहों पर अरबों की संपत्ति होने का पता चला है। अकेले गाजियाबाद में उसकी काफी अचल संपत्ति होने का पता एटीएस को चला है। जिले के एक स्कूल में भी फंडिंग करने की आशंका जताई गई है। पुलिस स्कूल से जुड़े लोगों की कुंडली और बैंक डिटेल खंगाल रही है। उधर, उमर के कनेक्शन खंगालने के लिए एटीएस जल्द जनपद भी आ सकती है। थरियांव पुलिस मंगलवार को पंथुआ गांव जांच करने पहुंची। शहर में रहने वाले भाई उदयभान के बयान दर्ज किए हैं। एटीएस ने जनपद पुलिस से मौलाना उमर गौतम के करीबियों और उनकी प्रापर्टी संबंधी जानकारी मांगी है। एसपी सतपाल अंतिल के निर्देश पर थरियांव पुलिस मामले की जांच में जुटी है। थरियांव थानेदार नंदलाल सिंह ने उमर के शहर में रहने वाले भाई उदयभान सिंह के बयान लिए और उमर के संबंध में पूछताछ की।
उन्होंने पुलिस को उमर गौतम से कोई वास्ता न होने की बात कही है। हालांकि पुलिस को गाजियाबाद में अरबों की अचल संपत्ति होने का पता चला है। पुलिस ने ग्रामीणों से भी उमर के बारे में पूछताछ की। उधर, एटीएस उमर से जुड़े कई लोगों का बैंक डिटेल खंगाल रही है। शहर में संचालित एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में मौलाना उमर द्वारा मोटी फंडिंग किए जाने की चर्चा है।
लोगों का कहना है कि इस स्कूल में उमर गौतम ने बड़ी रकम की फंडिंग की है। उमर गौतम जब भी गांव आता था तो अंदौली का एक व्यक्ति हमेशा उसके साथ रहता था। इस व्यक्ति का बहुआ रोड पर एफसीआई गोदाम के समीप ट्रैक्टर ट्राली बनाने का कारखाना है। मो. उमर जब भी जनपद आया, तो इसी शख्स ने सारी व्यवस्थाओं को देखा। कई लोगों ने उससे वित्तीय मदद भी ली है। थानेदार नंदलाल सिंह ने बताया एटीएस मामले की पड़ताल के लिए कभी भी फतेहपुर आ सकती है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है।
पंथुआ गांव में लोगों का कहना है कि धर्म परिवर्तन उमर गौतम का निजी फैसला है। लेकिन किसी का धर्म परिवर्तित कराना गलत है। ग्रामीणों का कहना है कि श्याम प्रताप सिंह उर्फ उमर गौतम ने जो किया वह गलत है। पंथुआ गांव के युवाओं का कहना है कि हम लोगों ने उसे कभी देखा ही नहीं। धर्म बदलने से गांव व परिजन उससे नाराज रहते थे। जिस श्याम प्रताप का लोग जिक्र भी नहीं करते थे, अब सभी के जुबां पर उसके बदले नाम उमर गौतम की ही चर्चा है।
गांव के ही रहने वाले उमर के चचेरे भाई राजू सिंह का कहना है कि यदि मो. उमर विदेशी फंडिंग करता था तो उनके साथ कोई भी व्यक्ति साथ नहीं खड़ा है। उसको पुलिस खुद सजा देगी। लंबे समय से वह बाहर है। जिसके कारण उसकी गतिविधियां पता नहीं चल सकीं। उसका पूरा परिवार गांव में नहीं रहता। कभी काम व अन्य वैवाहिक कार्यक्रम हुआ तो कुछ लोग आते हैं। भाई के धर्म बदलने पर सारा परिवार गांव छोड़कर चला गया था।

